Saturday, 9 May 2009

जैकारदेवा

आज ०९-०५-२००९ को श्री कोटेश्वर महादेव अपनी यात्रा पर निकल गये है। श्री महादेव के साथ गए सभी भक्तो को हर कुमारसैन वासियों की शुभकामना ।

हमारी विशुद्ध परम्परा के अनुसार कुमारसैन जनपद में श्री महादेव के यात्रा से वापिस लौटने तक इलाके में कोई भी शुभ कार्य इस लिए नही होंगे क्यूकि कुमारसैन के जनमानस ने श्री महादेव को अपना राजा माना है, और जब राजा राजधानी से बाहर किसी उदेश्य की पूर्ति के लिए गये हों तो जागरूक तथा सेवक प्रजा उन की अनुपस्थिति में अपनी खुशियाँ अकेले नही बाँट सकती जो सच्चा राजधर्म हैं तथा प्रजा की अपने राजा के प्रति सच्ची आस्था का प्रतीक भी। कुमारसैन की प्रजा पर तो यह बात दोहरी लागु होती है, क्यूकि श्री कोटेश्वर महादेव कुमारसैन जनपद के राजा ही नहीं अपितु ईष्ट देव हैं। ईष्ट तो अनन्य होता है, अपना हृदयी होता है, फ़िर जब अपना, जिसे आप हृदय से प्रेम करते हैं, अपना आदर्श मानते हैं, उस की जुदाई में आप खुशियाँ किस के लिए व् कैसे मना सकते हैं ? श्री कोटेश्वर महादेव तो कुमारसैन जनपद के ईष्ट हैं, मित्र हैं, भगवान हैं, तारनहार हैं, कर्णधार तथा सर्वोसर हैं, इस लिए उन के कुमारसैन से बाहर यात्रा पर रहने तक कुमारसैन में श्री महादेव के केदारनाथ से वापिस आने तक बंदिश में रहना हर कुमारसैन वासी का नैतिक धर्म, कर्तव्य तथा देवता जी के प्रति निष्ठित रहने का परम दायित्व है। इस का दूसरा पहलु जो भावनात्मक है, वह यह, क्यूकि, श्री महादेव के साथ जो कुमारसैन से सेवक गये हैं, वह सभी हमारे भाई, बंधू, ईष्ट-मित्र, रिश्तेदार हैं, उन की गैरमौजूदगी में भी हम कैसे अकले - अकेले खुशियाँ मना ले यह तो किसी भी दृष्टिकोण से अच्छा नहीं लगता न ? इसीलिए हमारे प्रबुद्ध बजुर्गों ने इस स्वस्थ परम्परा का प्रचलन रखा है, जो तर्कसंगत, प्रखर सोच तथा एक ईष्ट को मानने वालों की एकता, अखंडता की अद्भुत मिसाल कायम करने का परचायक हैं। अता: हमे उन मूल्यों का, मर्यादायों का निष्ठां से पालन करना चाहिए, और अपने को श्री महादेव के श्री चरणों में समर्पित होकर सच्चे मन से हर रोज उन की राह निहारनी चाहिए जैसे अयोध्या वासियों ने श्री राम की राह निहार-निहार कर अपना जीवन सफल किया।" जो गये हैं साथ उन की यात्रा आनंदमयी हो, इस शुभकामना के साथ, कि जब आयेंगे वापिस महादेव, परिजनों के साथ खुशियों के साथ-साथ बाँटेगे अनुभवों की सौगात, मनायेगे उत्सव कोटेश्वर महादेव के शुभागमन का कुछ इस कद्र जैसे अयोध्या आयें हों श्री राम विजय पताका लेकर"


निवेदक:- अमृत कुमार शर्मा

किंगल, कुमारसैन, शिमला-हि० प्र०